Breaking News
बदलते मौसम में बुखार को न लें हल्के में, मलेरिया का हो सकता है संकेत
बदलते मौसम में बुखार को न लें हल्के में, मलेरिया का हो सकता है संकेत
‘द केरल स्टोरी 2’ ओटीटी पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार, जानिये कब और कहाँ देख सकेंगे फिल्म
‘द केरल स्टोरी 2’ ओटीटी पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार, जानिये कब और कहाँ देख सकेंगे फिल्म
127 इन्फैंट्री बटालियन (इकोलॉजिकल), गढ़वाल राइफल्स को मिला मुख्यमंत्री प्रशंसा सम्मान
127 इन्फैंट्री बटालियन (इकोलॉजिकल), गढ़वाल राइफल्स को मिला मुख्यमंत्री प्रशंसा सम्मान
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के टॉपर्स से की फोन पर बात, दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के टॉपर्स से की फोन पर बात, दी शुभकामनाएं
विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारियां तेज, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक
विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारियां तेज, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में सफल सभी विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में सफल सभी विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं
इंडियन प्रीमियर लीग 2026- दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स के बीच मुकाबला आज
इंडियन प्रीमियर लीग 2026- दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स के बीच मुकाबला आज
मुख्यमंत्री धामी ने हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती पर दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री धामी ने हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती पर दी श्रद्धांजलि
उत्तराखंड बोर्ड का रिजल्ट जारी, हाईस्कूल में 92.10% और इंटर में 85.11% छात्र सफल
उत्तराखंड बोर्ड का रिजल्ट जारी, हाईस्कूल में 92.10% और इंटर में 85.11% छात्र सफल

यूसीसी – महिलाओं और बच्चों को मिली सामाजिक- आर्थिक सुरक्षा

यूसीसी – महिलाओं और बच्चों को मिली सामाजिक- आर्थिक सुरक्षा

देहरादून। समान नागरिक संहिता, के लिए ड्राफ्ट तय करने वाली विशेषज्ञ कमेटी की सदस्य और दून विश्वविद्यालय की वीसी प्रो. सुरेखा डंगवाल के मुताबिक उत्तराखंड समान नागरिक संहिता के जरिए ना सिर्फ महिलाओं और बच्चों की सामाजिक आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है। बल्कि इससे विवाह संस्था को भी मज़बूती मिलेगी । प्रो. सुरेखा डंगवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता की भावना ही, लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करते हुए समता स्थापित करना है। उन्होने कहा कि अभी कई ऐसे मामले सामने आ रहे थे, जिसमें महिलाओं को पता ही नहीं होता था कि उनके पति की दूसरी शादी भी है। कुछ जगह धार्मिक पंरपराओं की आड़ में भी ऐसा किया जा रहा था। इस तरह अब शादी का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने से, महिलाओं के साथ इस तरह का धोखे की सम्भावना न्यूनतम हो जाएगी। साथ ही इससे चोरी छिपे 18 साल से कम उम्र में लड़कियों की शादी की कुप्रथाओं पर रोक लग सकेगी। इससे बेटियां निश्चित होकर अपनी उच्च शिक्षा जारी रख सकती हैं।

बुजुर्गों और बच्चों को भी सुरक्षा
प्रो. सुरक्षा डंगवाल के मुताबिक उत्तराखंड समान नागरिक संहिता में व्यक्ति की मौत होने पर उनकी सम्पत्ति में पत्नी और बच्चों के साथ माता पिता को भी बराबर के अधिकार दिए गए हैं। इससे बुजुर्ग माता पिता के अधिकार भी सुरक्षित रह सकेंगे। इसी तरह लिव इन से पैदा बच्चे को भी विवाह से पैदा संतान की तरह माता और पिता की अर्जित सम्पत्ति में हक दिया गया है। इससे लिव इन रिलेशनशिप में जिम्मेदारी का भाव आएगा, साथ ही विवाह एक संस्था के रूप में और अधिक समृद्ध होगा साथ ही स्पष्ट गाइडलाइन होने से कोर्ट केस में भी कमी आएगी।

प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा भारत का संविधान दो वयस्क नागरिकों को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की अनुमति देता है। इसके लिए पहले से ही विशेष विवाह अधिनियम मौजूद है, इसमें भी आपत्तियां मांगी जाती है। अब इसी तरह कुछ मामलों में अभिभावकों को सूचना दी जाएगी। वहीं लव जिहाद की घटनाओं को रोकने के लिए पहले से ही धर्मांतरण कानून लागू है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top