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स्पेस मीट की तैयारी को लेकर यूसैक में संगोष्ठी आयोजित, 21 विभागों के अधिकारियों ने की भागीदारी

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प्राकृतिक संसाधनों और आपदाओं के प्रबंधन में सैटेलाइट डेटा की अहम भूमिका पर जोर

देहरादून। उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सभागार में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य आगामी जुलाई में प्रस्तावित “स्पेस मीट” कार्यशाला की रूपरेखा तय करना और विभिन्न विभागों में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा करना रहा। संगोष्ठी में राज्य के 21 रेखीय विभागों के 40 अधिकारियों, वैज्ञानिकों और अभियंताओं ने सहभागिता की।

इस संगोष्ठी का आयोजन यूसैक द्वारा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस हिमालयी राज्यों की जरूरतों के अनुरूप अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उसके अनुप्रयोगों पर केंद्रित रहा। संगोष्ठी में विभागों द्वारा संचालित परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं पर आधारित एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने की दिशा में चर्चा की गई, जो “विकसित भारत 2047” की थीम पर प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए उत्तराखण्ड का रोडमैप तैयार करेगा।

यूसैक के निदेशक प्रोफेसर एम. पी. एस. पंत ने बताया कि सभी रेखीय विभागों को आठ प्रमुख थीमों—कृषि, पर्यावरण एवं ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट, जल संसाधन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, विकास योजना और संचार एवं नेविगेशन—में बांटते हुए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के मौजूदा और भविष्य के उपयोग का लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा।

इस अवसर पर इसरो के क्षेत्रीय सुदूर संवेदन केंद्र नॉर्थ के वैज्ञानिक डॉ. अभिनव शुक्ला ने प्रस्तावित राष्ट्रीय स्पेस मीट की जानकारी साझा की, जबकि भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण ठाकुर ने भारतीय अंतरिक्ष मिशनों और उनके अनुप्रयोगों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

संगोष्ठी का संचालन यूसैक की वैज्ञानिक डा. सुषमा गैरोला द्वारा किया गया। संगोष्ठी में यूसैक के वैज्ञानिकों. डा. अरूणा रानी, डा. आशा थपलियाल डा. प्रियदर्शी उपाध्यायए डा. गजेन्द्र सिंह रावत, डा. नीलम रावत, पुष्कर कुमार, शशांक लिंगवाल, डा. दिव्या उनियाल, आर.एस. मेहता,  सुधाकर भट्ट, प्रदीप सिंह रावत, देवेश कपरूवाण, सौरभ डंगवाल, गोविन्द सिंह नेगी, विकास शर्मा, कुशलानंद सेमवाल, चन्द्रमोहन फर्स्वाण, श्रीमती मीना पंत आदि उपस्थित थे।

स्पेस मीट से पहले यह संगोष्ठी एक महत्वपूर्ण प्रयास है जो राज्य की विकास योजनाओं में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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