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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग पर लगाया दो लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग पर लगाया दो लाख का जुर्माना

एक से अधिक मतदाता सूची में नाम दर्ज करने संबंधी आयोग का स्पष्टीकरण असंवैधानिक करार

देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने आयोग की याचिका खारिज करते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी उम्मीदवार का नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज नहीं होना चाहिए और आयोग का स्पष्टीकरण कानून के प्रावधानों के खिलाफ है।

आयोग का तर्क और हाईकोर्ट का फैसला

निर्वाचन आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में कहा था कि यदि किसी प्रत्याशी का नाम एक से अधिक ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों में दर्ज हो, तो केवल इस आधार पर उसका नामांकन निरस्त नहीं किया जाएगा। जुलाई 2024 में नैनीताल हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण पर रोक लगाते हुए कहा था कि यह उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के खिलाफ है। अदालत ने इसे “वैधानिक प्रतिबंध” बताते हुए आयोग के स्पष्टीकरण को अवैध करार दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए आयोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। लेकिन न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि आयोग संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कैसे कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कानून में स्पष्ट रोक है, तो आयोग का स्पष्टीकरण असंवैधानिक और अवैध है।

धारा 9 की उपधाराएँ स्पष्ट

कानून की धारा 9(6) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में या एक ही सूची में दो बार नाम दर्ज नहीं करा सकता। वहीं, धारा 9(7) कहती है कि यदि किसी का नाम नगर निगम, नगरपालिका या अन्य शहरी निकाय की सूची में दर्ज है, तो दूसरी सूची में शामिल होने से पहले उसे पूर्व सूची से हटाना अनिवार्य है।

आयोग पर जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की दलील खारिज करते हुए साफ कर दिया कि किसी भी उम्मीदवार को दोहरी मतदाता सूची में नाम दर्ज होने पर चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही, हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने पर आयोग पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

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