Breaking News
कृषि विभाग में अनियमितताओं के प्रकरण में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दिए जांच के आदेश
कृषि विभाग में अनियमितताओं के प्रकरण में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दिए जांच के आदेश
‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत, दूरस्थ महिलाओं को न्याय दिलाने की बड़ी पहल
‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत, दूरस्थ महिलाओं को न्याय दिलाने की बड़ी पहल
मुख्यमंत्री धामी ने पेश किया ₹1.11 लाख करोड़ का बजट
मुख्यमंत्री धामी ने पेश किया ₹1.11 लाख करोड़ का बजट
इंडोनेशिया में बड़ा हादसा, भारी बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर ढहा, पांच लोगों की मौत
इंडोनेशिया में बड़ा हादसा, भारी बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर ढहा, पांच लोगों की मौत
कान साफ करने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
कान साफ करने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
गैरसैंण में यूकेडी का प्रदर्शन, विधानसभा घेराव की कोशिश पर पुलिस से झड़प
गैरसैंण में यूकेडी का प्रदर्शन, विधानसभा घेराव की कोशिश पर पुलिस से झड़प
आलिया भट्ट की आगामी फिल्म ‘अल्फा’ का पोस्टर जारी, रिलीज डेट का भी हुआ एलान
आलिया भट्ट की आगामी फिल्म ‘अल्फा’ का पोस्टर जारी, रिलीज डेट का भी हुआ एलान
पश्चिम एशिया में तनाव पर सरकार चिंतित, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- एस जयशंकर
पश्चिम एशिया में तनाव पर सरकार चिंतित, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- एस जयशंकर
टी20 विश्व कप 2026- भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर खिताब किया अपने नाम
टी20 विश्व कप 2026- भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर खिताब किया अपने नाम

बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों की सेहत पर डाल रहा बुरा असर, वक़्त रहते हो जाएं सावधान

बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों की सेहत पर डाल रहा बुरा असर, वक़्त रहते हो जाएं सावधान

बदलती जीवनशैली और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता का असर अब आंखों की सेहत पर साफ नजर आने लगा है। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग में आंखों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन देखने, असंतुलित खानपान और शुगर व ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के ठीक से नियंत्रित न होने के कारण आंखों की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

इन समस्याओं में ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है, जो चुपचाप आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती है। यह रोग धीरे-धीरे आंखों की ऑप्टिक नर्व को प्रभावित करता है और समय रहते पहचान व इलाज न होने पर स्थायी अंधेपन का कारण भी बन सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ग्लूकोमा दुनिया भर में अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजर नहीं आते, जिस वजह से लोग देर से डॉक्टर तक पहुंचते हैं।

क्या है ग्लूकोमा?

ग्लूकोमा में आंखों के अंदर दबाव बढ़ जाता है, जिससे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है। आंखों में मौजूद तरल पदार्थ का सही तरीके से बाहर न निकल पाना इस दबाव को बढ़ा देता है। उम्र बढ़ने के साथ इस बीमारी का खतरा बढ़ता जाता है। इसके अलावा जिन लोगों को डायबिटीज है, जिनके परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा रहा हो या जिन्हें आंखों में चोट लगी हो, उनमें इसका जोखिम अधिक होता है।

किन लक्षणों पर दें ध्यान

नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार ग्लूकोमा की शुरुआत में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। लेकिन बीमारी बढ़ने पर धीरे-धीरे किनारों से दिखाई देना कम होने लगता है। आंखों में भारीपन, दर्द, सिरदर्द या रोशनी के चारों ओर घेरा नजर आना भी इसके संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इन लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

बचाव और सावधानी जरूरी

हालांकि ग्लूकोमा से पूरी तरह बचाव संभव नहीं है, लेकिन समय पर जांच और उपचार से अंधेपन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही संतुलित आहार, जिसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल हों, आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है। शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी आंखों की रोशनी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है।

(साभार)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top