Breaking News
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने गंगोत्री धाम में की पूजा-अर्चना
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने गंगोत्री धाम में की पूजा-अर्चना
1098 पर कॉल करें, मुसीबत में बच्चों को मिलेगी मदद
1098 पर कॉल करें, मुसीबत में बच्चों को मिलेगी मदद
विकासखंड कोट में सेवा संकल्प अभियान के बहुउद्देशीय शिविर में उमड़ा उत्साह
विकासखंड कोट में सेवा संकल्प अभियान के बहुउद्देशीय शिविर में उमड़ा उत्साह
रोजाना ब्रोकली खाने से शरीर को मिलते हैं ये 5 बड़े फायदे, हड्डियां भी होंगी मजबूत
रोजाना ब्रोकली खाने से शरीर को मिलते हैं ये 5 बड़े फायदे, हड्डियां भी होंगी मजबूत
बांग्लादेश में ड्रम के अंदर मिला हिंदू ज्वैलर का शव, सिर-छाती पर धारदार हथियार के निशान
बांग्लादेश में ड्रम के अंदर मिला हिंदू ज्वैलर का शव, सिर-छाती पर धारदार हथियार के निशान
आंगनबाड़ी केंद्र है बच्चों के भविष्य की बुनियाद रखने का प्रथम आयाम- रेखा आर्या
आंगनबाड़ी केंद्र है बच्चों के भविष्य की बुनियाद रखने का प्रथम आयाम- रेखा आर्या
SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर 30 सितंबर को बैठक कर सकता है INDIA गुट
SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर 30 सितंबर को बैठक कर सकता है INDIA गुट
विद्यार्थी और किसान देश की प्रगति के आधार- गणेश जोशी
विद्यार्थी और किसान देश की प्रगति के आधार- गणेश जोशी
विद्यार्थी और किसान देश की प्रगति के आधार- गणेश जोशी
विद्यार्थी और किसान देश की प्रगति के आधार- गणेश जोशी

मछली पालन से स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रहे पाबौ के राजेंद्र चमोली

मछली पालन से स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रहे पाबौ के राजेंद्र चमोली

सात तालाबों में कर रहे मछली उत्पादन, तीन महिलाओं को भी दिया रोजगार का अवसर

पौड़ी- उत्तराखंड में स्वरोजगार और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच पौड़ी गढ़वाल के पाबौ विकासखंड के बिडोली गांव निवासी राजेंद्र चमोली मछली पालन को आय का बेहतर जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से मछली उत्पादन से जुड़े राजेंद्र ने अपने इस कार्य से तीन महिलाओं को भी जोड़ा है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर मिल रहा है।

मत्स्य विभाग के सहयोग से शुरू हुई राजेंद्र की यह पहल अब सात तालाबों तक पहुंच चुकी है। इनमें पंगास और ग्रास कार्प का उत्पादन किया जा रहा है। राजेंद्र वर्ष में दो से तीन बार मछली का उत्पादन कर स्थानीय बाजारों में बिक्री करते हैं। वर्तमान में एक उत्पादन चक्र में करीब 4 कुंतल मछली का उत्पादन हो रहा है, जिसकी स्थानीय बाजारों में आसानी से बिक्री हो जाती है। उत्पादन को और बढ़ाने तथा विविधता लाने के लिए राजेंद्र अब गोल्डन फिश का बीज डालने की भी तैयारी कर रहे हैं।

मछली उत्पादन से होने वाली आय में से महिलाओं को भुगतान करने के बाद राजेंद्र सालाना करीब 3 लाख रुपये की बचत कर रहे हैं। वहीं, उनके साथ जुड़ी महिलाएं भी मछली पालन से अच्छी आमदनी अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि राजेंद्र चमोली पिछले करीब पांच वर्षों से प्रेरणा मत्स्यजीवी सहकारी समिति से जुड़े हैं। इससे पूर्व वह सब्जी उत्पादन का कार्य करते थे। विभागीय सहयोग एवं मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें मछली पालन के लिए लाभान्वित किया गया, जिसके बाद उन्होंने मछली उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया।

राजेंद्र की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका के नए अवसर तैयार करने की मिसाल बन रही है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के स्वरोजगार एवं ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के प्रयासों के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसरों को मजबूती मिल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मछली पालन से स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रहे पाबौ के राजेंद्र चमोली

सात तालाबों में कर रहे मछली उत्पादन, तीन महिलाओं को भी दिया रोजगार का अवसर

पौड़ी- उत्तराखंड में स्वरोजगार और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच पौड़ी गढ़वाल के पाबौ विकासखंड के बिडोली गांव निवासी राजेंद्र चमोली मछली पालन को आय का बेहतर जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से मछली उत्पादन से जुड़े राजेंद्र ने अपने इस कार्य से तीन महिलाओं को भी जोड़ा है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर मिल रहा है।

मत्स्य विभाग के सहयोग से शुरू हुई राजेंद्र की यह पहल अब सात तालाबों तक पहुंच चुकी है। इनमें पंगास और ग्रास कार्प का उत्पादन किया जा रहा है। राजेंद्र वर्ष में दो से तीन बार मछली का उत्पादन कर स्थानीय बाजारों में बिक्री करते हैं। वर्तमान में एक उत्पादन चक्र में करीब 4 कुंतल मछली का उत्पादन हो रहा है, जिसकी स्थानीय बाजारों में आसानी से बिक्री हो जाती है। उत्पादन को और बढ़ाने तथा विविधता लाने के लिए राजेंद्र अब गोल्डन फिश का बीज डालने की भी तैयारी कर रहे हैं।

मछली उत्पादन से होने वाली आय में से महिलाओं को भुगतान करने के बाद राजेंद्र सालाना करीब 3 लाख रुपये की बचत कर रहे हैं। वहीं, उनके साथ जुड़ी महिलाएं भी मछली पालन से अच्छी आमदनी अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि राजेंद्र चमोली पिछले करीब पांच वर्षों से प्रेरणा मत्स्यजीवी सहकारी समिति से जुड़े हैं। इससे पूर्व वह सब्जी उत्पादन का कार्य करते थे। विभागीय सहयोग एवं मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें मछली पालन के लिए लाभान्वित किया गया, जिसके बाद उन्होंने मछली उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया।

राजेंद्र की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका के नए अवसर तैयार करने की मिसाल बन रही है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के स्वरोजगार एवं ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के प्रयासों के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसरों को मजबूती मिल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top