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प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को तैयार उत्तराखंड

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मुख्यमंत्री ने ‘आपदा सखी योजना’ का ऐलान किया, 95 महिला स्वयंसेवक पहले चरण में होंगे प्रशिक्षित

देहरादून- में आयोजित एक अहम कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय पर और समन्वित कार्रवाई से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए जल्द ही ‘आपदा सखी योजना’ शुरू की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत महिलाओं को आपदा पूर्व चेतावनी, प्राथमिक चिकित्सा, राहत-बचाव कार्यों और मानसिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। पहले चरण में आजीविका मिशन से जुड़ीं 95 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रोएक्टिव और रिएक्टिव रणनीतियों की अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि गौरीकुंड में 2024 की आपदा के समय पूर्व तैयारी ने हजारों लोगों की जान बचाई थी। उन्होंने संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी, क्रेन और जरूरी उपकरणों की पूर्व तैनाती के निर्देश भी दिए।

राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बताया कि मौसम विभाग ने इस वर्ष सामान्य से अधिक मानसून का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले सभी जरूरी तैयारी कर ली जाए, ताकि संभावित आपदा की मार को न्यूनतम किया जा सके।

एनडीएमए के सदस्य राजेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तराखंड को इस बार भूस्खलन से निपटने के लिए 140 करोड़ रुपए, संवेदनशील झीलों की निगरानी के लिए 40 करोड़ रुपए, और फॉरेस्ट फायर प्रबंधन के लिए 16 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है।

कार्यशाला में तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए, जिसमें मौसम विज्ञान, बाढ़ पूर्वानुमान, भूस्खलन और आपात प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने मानसून 2025 के दृष्टिगत विभिन्न तैयारियों पर प्रकाश डाला। इस दौरान राज्य के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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