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एटीआई नैनीताल ने कनिष्ठ अभियंताओं के लिए शुरू किया राष्ट्रीय अध्ययन भ्रमण

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शहरी विकास, स्मार्ट सिटी और पर्यावरणीय प्रबंधन की व्यावहारिक समझ के लिए 14 से 26 दिसंबर तक देश के प्रमुख शहरों का दौरा

देहरादून। एटीआई नैनीताल द्वारा आवास अनुभाग में नवनियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। विभागीय कार्यों में गुणवत्ता, नवाचार और आधुनिक तकनीकों के समावेश के उद्देश्य से कनिष्ठ अभियंताओं के लिए 14 दिसंबर से 26 दिसंबर 2025 तक एक व्यापक राष्ट्रीय अध्ययन भ्रमण (स्टडी टूर) का आयोजन किया गया है। यह अध्ययन भ्रमण देश के प्रमुख शहरी केंद्रों देहरादून, शिमला, चंडीगढ़, नोएडा एवं दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस अध्ययन भ्रमण का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को शहरी नियोजन, आवासीय विकास, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, ढलान स्थिरता, पार्किंग समाधान, सार्वजनिक स्थलों के प्रबंधन तथा सतत विकास मॉडल से व्यावहारिक रूप से अवगत कराना है।

अभियंताओं का सहस्रधारा क्षेत्र में विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क का भ्रमण
अध्ययन भ्रमण की शुरुआत देहरादून से हुई। अध्ययन भ्रमण के प्रथम चरण में अभियंताओं को मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा सहस्रधारा क्षेत्र में विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क का भ्रमण कराया गया। इस दौरान अभियंताओं ने पार्क की योजना, लैंडस्केप डिज़ाइन, हरित विकास मॉडल, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े उपायों तथा नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन का विस्तार से अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान अभियंताओं ने पार्क में भ्रमण हेतु आए विभिन्न विद्यालयों के छात्र–छात्राओं, शिक्षकों एवं उनके परिजनों से संवाद स्थापित कर सिटी फॉरेस्ट को लेकर उनकी प्रतिक्रिया और अनुभव भी जाने। आम नागरिकों से प्राप्त फीडबैक के माध्यम से अभियंताओं को यह समझने का अवसर मिला कि किस प्रकार सार्वजनिक हरित स्थलों को नागरिकों की आवश्यकताओं और पर्यावरणीय संतुलन के अनुरूप विकसित किया जा सकता है। यह अनुभव अभियंताओं के लिए अत्यंत उपयोगी एवं सीखप्रद रहा।

इसके साथ ही अभियंता देहरादून के अन्य क्षेत्रों का भ्रमण कर इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), आईटीडीए, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, शहरी निगरानी प्रणाली, सार्वजनिक पार्कों की लैंडस्केपिंग, मटेरियल रिकवरी सेंटर एवं विरासत स्थलों के पुनर्विकास कार्यों का अध्ययन करेंगे। इसके पश्चात अभियंताओं का दल शिमला पहुंचेगा। शिमला में हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HIMUDA) द्वारा संचालित पहाड़ी क्षेत्रों की आवासीय योजनाओं, ढलान आधारित निर्माण तकनीक, शहरी गतिशीलता, संरचित पार्किंग, हेरिटेज पब्लिक स्पेस तथा शहरी प्रशासन से जुड़े नवाचारों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जाएगा।

अगले चरण में अध्ययन भ्रमण चंडीगढ़ में आयोजित होगा, जहां अभियंता पिंक मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, आरडीएफ प्लांट, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट प्लांट, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, रॉक गार्डन, सुखना लेक एवं सिटीवाइड डेटा इंटीग्रेशन से जुड़े आईसीसीसी का अध्ययन करेंगे। अध्ययन भ्रमण के अंतिम चरण में अभियंता नोएडा और दिल्ली में आधुनिक कार्यालय भवनों, वेटलैंड आधारित अपशिष्ट प्रबंधन, निजी आवासीय परियोजनाओं, बड़े सार्वजनिक स्थलों, रोबोटिक पार्किंग प्रणाली तथा अक्षरधाम मंदिर जैसे उच्च जन-आवागमन वाले स्थलों के प्रबंधन मॉडल को समझेंगे। अध्ययन भ्रमण का समापन 26 दिसंबर 2025 को होगा। विभाग का विश्वास है कि यह पहल भविष्य में उत्तराखंड को एक सुव्यवस्थित, स्मार्ट और पर्यावरण-संतुलित राज्य के रूप में विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का बयान
अध्ययन भ्रमण के संबंध में उपाध्यक्ष मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण { एमडीडीए } बंशीधर तिवारी ने कहा कि आज के समय में शहरी विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्मार्ट तकनीक, पर्यावरणीय संतुलन और नागरिक सुविधाओं के समन्वय का विषय बन चुका है। इस अध्ययन भ्रमण के माध्यम से हमारे कनिष्ठ अभियंता देश के अग्रणी शहरों में अपनाए जा रहे आधुनिक मॉडल को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे, जिससे उत्तराखंड में योजनाओं के क्रियान्वयन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड में टिकाऊ, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास को बढ़ावा दिया जाए और इस दिशा में अभियंताओं का प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सचिव मोहन सिंह बर्निया का बयान
वहीं सचिव मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण { एमडीडीए } मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि यह अध्ययन भ्रमण कनिष्ठ अभियंताओं की तकनीकी क्षमता, योजना निर्माण कौशल और नवाचार को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विभिन्न राज्यों की श्रेष्ठ प्रथाओं को समझकर अभियंता उन्हें उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस भ्रमण से अभियंताओं को अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज ट्रीटमेंट, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण एवं आधुनिक पार्किंग समाधान जैसे विषयों पर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिसका सीधा लाभ राज्य की आवासीय एवं शहरी परियोजनाओं को मिलेगा।

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