Breaking News
जौनसार की संस्कृति, परंपराएँ और प्रकृति के प्रति सम्मान, राज्य की समृद्ध विरासत है- मुख्यमंत्री
जौनसार की संस्कृति, परंपराएँ और प्रकृति के प्रति सम्मान, राज्य की समृद्ध विरासत है- मुख्यमंत्री
​देवभूमि की शांति भंग करने वाले अपराधियों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शेगी सरकार- कुसुम कण्डवाल
​देवभूमि की शांति भंग करने वाले अपराधियों को किसी भी सूरत में नहीं बख्शेगी सरकार- कुसुम कण्डवाल
जनता की शिकायतों का समयबद्ध और संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित करें- जिलाधिकारी
जनता की शिकायतों का समयबद्ध और संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित करें- जिलाधिकारी
मंत्री गणेश जोशी ने टिहरी में चारधाम यात्रा मार्ग का किया निरीक्षण, दिए गुणवत्तापूर्ण कार्य के निर्देश
मंत्री गणेश जोशी ने टिहरी में चारधाम यात्रा मार्ग का किया निरीक्षण, दिए गुणवत्तापूर्ण कार्य के निर्देश
2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में सभी का योगदान जरूरी- मुख्यमंत्री
2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में सभी का योगदान जरूरी- मुख्यमंत्री
दक्षिणी फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का भूकंप, पांच लोगों की मौत
दक्षिणी फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का भूकंप, पांच लोगों की मौत
‘पेद्दी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल, चार दिन में कमाए इतने करोड़ रूपए
‘पेद्दी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल, चार दिन में कमाए इतने करोड़ रूपए
ऋषिकेश में बदमाशों के साथ हुई पुलिस की मुठभेड़, दो अपराधी गोली लगने से घायल
ऋषिकेश में बदमाशों के साथ हुई पुलिस की मुठभेड़, दो अपराधी गोली लगने से घायल
न्याय की सार्थकता उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में निहित है- मुख्यमंत्री धामी
न्याय की सार्थकता उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में निहित है- मुख्यमंत्री धामी

वक्फ अधिनियम 2025 की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में गरमागरम बहस, फैसला सुरक्षित

वक्फ अधिनियम 2025 की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में गरमागरम बहस, फैसला सुरक्षित

केंद्र सरकार और याचिकाकर्ताओं के बीच ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ को लेकर तीखी बहस, अदालत ने अंतरिम राहत पर फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तीन दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम राहत पर निर्णय सुरक्षित रखा।

याचिकाकर्ताओं की आपत्तियाँ
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी सहित कई याचिकाकर्ताओं ने इस संशोधन को मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप बताते हुए चुनौती दी है। उनका मुख्य तर्क है कि ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ (waqf by user) की अवधारणा को हटाने से सदियों पुराने मस्जिदों, कब्रिस्तानों और धर्मार्थ संपत्तियों का धार्मिक स्वरूप समाप्त हो सकता है, जो औपचारिक वक्फ दस्तावेजों के बिना भी अस्तित्व में हैं।

केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार ने अधिनियम का बचाव करते हुए कहा कि वक्फ एक इस्लामी अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड धर्मनिरपेक्ष कार्य करते हैं, इसलिए इनमें गैर-मुस्लिमों को शामिल करना अनुचित नहीं है।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने बताया कि 1923 से ही सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ की अवधारणा के कारण निजी और सरकारी संपत्तियों पर अनधिकृत दावे किए जा रहे थे। इस संशोधन का उद्देश्य ऐसे दुरुपयोग को रोकना है।

अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कुछ याचिकाओं को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि “हर कोई चाहता है उसका नाम अखबारों में छपे”, जो याचिकाकर्ताओं के इरादों पर सवाल उठाता है। अदालत का मानना है कि कई याचिकाएं केवल प्रचार या दिखावे की दृष्टि से दायर की गई हैं।

आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत पर कोई आदेश नहीं दिया है, लेकिन केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह अधिनियम के कुछ प्रमुख प्रावधानों को तत्काल लागू नहीं करेगी। अदालत ने इस आश्वासन को दर्ज किया है।

अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और धार्मिक अधिकारों के संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top